कहो कैसे कह दूं कि तुम मेरे हो .... दो निवाले तक तुम मुझे खिला नहीं सकते मैं जब पुकारूं तो तुम आ नहीं सकते जो नींद ना आए तो देकर थपकियां सुला नहीं सकते यूं झकझोर कर मुझे सुबह को उठा नहीं सकते सरे राह पुकार कर मुझे यूं बुला नहीं सकते साथ ज़िंदगी भर का है ये कैसे कहूं तुम साथ तो निभा नहीं सकते तेरे काँधे पे चाहूं सिर रखना पर तुम अपना कांधा बढ़ा नहीं सकते तुम अगर ज़ख़्म ना भी दो तो मेरे ज़ख्मों पर मरहम लगा नहीं सकते मैं कैसे कह दूं कि तुम मेरे हो मैं जब पुकारूं तो तुम आ नहीं सकते © Sumit Shrotriya official New Hindi Shayari
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